Subhash chandra bose ki jivani in hindi. सुभाष चन्द्र बोस के क्रांतिकारी विचार Subhash Chandra Bose Quotes in Hindi 2019-01-21

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Hindi Essay

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उन्हें रेडियो विज्ञान का पिता माना जाता है. इस कार्य के लिए इन्हें पकड कर 6 महीने के लिए जेल में डाल दिया गया. जलियांवाला कांड ने भारतीयों के मन में अंग्रेजो के प्रति आक्रोश की जिस ज्वाला को जन्म दिया था उससे साफ प्रतीत होता था की इस आग में जल्द से जल्द अंग्रेजी सरकार जलकर राख हो जाएगी. दिनकर जी का असामयिक देहान्त 24 अप्रैल 1974 को हो गया Ramdhari singh dinkar ki jivani दिनकर जी ने पटना विश्वविद्यालय से बी. शायद इन्हीं कहानियों ने मेरे मस्तिष्क मे प्रकृति की संरचना पर अनुसंधान करने की गहरी रुचि जगाई.


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जगदीश चंद्र बोस की जीवनी

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वे लंदन में मिले थे और जल्द ही अच्छे दोस्त भी बन गये. अभिगमन तिथि 23 नवम्बर 2013. He had advocated a revolutionary approach against the nonviolent attitude adopted by Mahatma Gandhi. दास देशबन्धु से मिलने के लिये कलकत्ता चले गये। पर इनकी मुलाकात देशबन्धु से नहीं हो पायी क्योंकि वो दौरे पर गये हुये थे। कुछ समय इंतजार करने के बाद इनकी भेंट दास से हुई जो बहुत हद तक निर्णायक भी रही। इन्होंने देशबन्धु जी से मुलाकात करके महसूस किया कि दास जानते हैं कि वो क्या करने जा रहें हैं और इसे प्राप्त करने के लिये कौन कौन सी रणनीतियों को अपनाने से सफलता मिलेगी। दास अपने लक्ष्य की उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये अपना सब कुछ त्याग करने के लिये तैयार थे, जिसके कारण वो दूसरों को भी सर्वस्व त्याग के लिये मांग कर सकते थे। सुभाष चन्द्र बोस देशबन्धु चितरंजन दास से मिलकर बहुत प्रभावित हुये। उनसे मिलकर बोस को ऐसा लगा कि अपने जीवन के उद्देश्य प्राप्ति के रास्ते के साथ-साथ गुरु भी प्राप्त कर लिया, जिसका ये जीवन भर अनुसरण कर सकेंगे। 1921 में देश के कोने कोने में तिहरे बहिष्कार की लहर थी। वकील न्यायालाय की प्रक्रिया में भाग न लेकर न्यायिक व्यवस्था का बहिष्कार कर रहे थे, छात्रों ने विद्यालयों में जाना छोड़ दिया, कांग्रेसी नेताओं ने विधान मंडल की प्रक्रिया में भाग लेना बन्द कर दिया। लोग इसमें बढ़-चढ़ कर भाग ले रहे थे। देशवासियों में राष्ट्र प्रेम की भावना उमड़ रही थी। ऐसे समय में देशबन्धु ने अपने नये युवा सहयोगी को तहे दिल से अपनाया और उन्हें बंगाल प्रान्त की कांग्रेस कमेटी तथा राष्ट्रीय सेवा दल का प्रचार प्रधान बनाने के साथ ही नये खुले नेशनल कॉलेज का प्रिंसीपल भी नियुक्त कर दिया। अपनी योग्यता और लगन से इतने सारे दायित्वों को कुशलता पूर्वक निभाकर बोस ने सभी को प्रभावित कर दिया। नवम्बर 1921 में ब्रिटिश राजसिंहासन के वारिस प्रिंस ऑफ वेल्स की भारत आने की घोषणा की गयी। कांग्रेस ने प्रिंस के बम्बई में उतरने के दिन सम्पूर्ण हड़ताल का आयोजन किया। कलकत्ता में भी अन्य नगरों की तरह अवसर के अनुकूल प्रतिक्रिया हुई। ऐसा लगने लगा था कि जैसे सुभाष चन्द्र के नेतृत्व कांग्रेस के स्वंय सेवकों ने ही सारे शहर को सम्भाल लिया हो। सुभाष चन्द्र बोस का आन्दोलन के मुखिया के रुप में चयन और गिरफ्तारी जब ब्रिटिश सरकार ने प्रिंस के आने की घोषणा की तो सारे देश में जगह-जगह कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा हड़तालों और बन्द का आयोजन किया गया, जिससे सरकार ने कांग्रेस सरकार को ही गैरकानूनी घोषित कर दिया। इस बात ने आग में घी डालने का कार्य किया। प्रदेश की कांग्रेस समिति ने सारे अधिकार अपने अध्यक्ष सी. In Hindi: राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्शों सत्यम, शिवम्, सुन्दरम से प्रेरित है. कलकत्ता में सुभाष बाबू के नेतृत्व में एक बड़ा जुलूस निकाला गया. यहां यह जानना आवश्यक है कि आजाद हिन्द फौज इण्डियन नेशनल आर्मी का गठन कैप्टन मोहन सिंह , रासबिहारी बोस एवं निरंजन सिंह गिल ने मिलकर 1942 में किया था जिसे बाद में नेताजी ने पुनर्गठित किया और इसमें नई शक्ति का संचार किया.

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Netaji Subhash Chandra Bose Hindi Essay नेताजी सुभाषचन्द्र बोस

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Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. यह कहना शायद अटपटा सा लगेगा की भारत को अंग्रेजो ने आजाद कर दिया. Read: Netaji Subhash Chandra Bose Quotes in Hindi: सुभाष चन्द्र बोस के कथन सुभाष चन्द बोस ने हमेशा पूर्ण स्वतंत्रता और इसके लिए क्रांतिकारी रास्ते ही सुझाए. आज उन्ही की बदौलत हम पौधों और उनकी क्रियाओ को भली भांति जान पाए है. बोस की शिक्षा एक बांग्ला विद्यालय में प्रारंभ हुई. Read: कई लोग तो यह भी मानते हैं कि भारत सरकार ये जानती थी कि नेताजी विमान दुर्घटना में नहीं मरे लेकिन उन्होंने जनता से यह सच्चाई छुपाई और इस सच्चाई को छुपाने का एक बहुत बड़ा कारण भी था कि नेताजी सुभाष चन्द्र बोस महात्मा गांधी के विरोधी थे और कोई भी कांग्रेसी गांधी के विरोधी को पसंद नहीं करता. अगर तुम भी अजेय बनना चाहते हो तो इन तीन आदर्शों को अपने ह्रदय में समाहित कर लो.

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन

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लेकिन अपनी खोजों से व्यावसायिक लाभ उठाने की जगह उन्होंने इन्हें सार्वजनिक रूप से प्रकाशित कर दिया ताकि अन्य शोधकर्त्ता इनपर आगे काम कर सके. प्रतिनिधि लेखक व कवि के रूप में इन्होंने अनेक देशों की यात्राये की! दास को सौंप दिये और इन्होंने बोस को आन्दोलन का मुखिया बना दिया। प्रान्त में आन्दोलन को संचालित करने में बोस ने अभूतपूर्व नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन किया। आन्दोलन दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा था। उस समय तो ये आन्दोलन और भी तेज हो गया जब सी. उनके जीजाजी अनंदमोहन बोस, जो पहले भारतीय उपद्रवी थे, की सिफारिश पर उन्हें वनस्पति विज्ञान का अभ्यास करने के लिए कैंब्रिज के क्रिस्टी महाविद्यालय में एडमिशन मिला. की परीक्षा देना चाहेंगे। अपने पिता के इस फैसले से इन्हें बहुत झटका लगा। इनकी सारी योजनाओं पर पानी फिर गया। इन्हें अपना निर्णय बताने के लिये 24 घंटे का समय दिया गया। इन्होंने कभी अपने सपने में भी अंग्रेज सरकार के अधीन कार्य करने के लिये नहीं सोचा था, लेकिन परिस्थतियों के सामने मजबूर होकर इन्होंने ये निर्णय ले लिया। इनके इस निर्णय के बाद एक सप्ताह के अन्दर ही पासपोर्ट बनवाकर इंग्लैण्ड जाने वाले जहाज पर व्यवस्था करा कर इनको भेज दिया गया। वो भारत से इंग्लैण्ड जाने के लिये 15 सितम्बर को रवाना हुये। प्रशासनिक सेवा की तैयारी इंग्लैण्ड जाकर आई. In Hindi: मेरे मन में कोई संदेह नहीं है कि हमारे देश की प्रमुख समस्याएं गरीबी, अशिक्षा, बीमारी, कुशल उत्पादन एवं वितरण सिर्फ समाजवादी तरीके से ही की जा सकती है.

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dr subhash chandra bose ki jivani Archives

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तब यह परोपकारी बालक अपने घर बिना बताये लोगो की सेवा में जुट गया. Also Read: Post Your Comments on: क्या नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की मौत को रहस्य बनाने के पीछे कांग्रेस का हाथ है? मैं जिस बांग्ला विद्यालय में भेजा गया वहाँ पर मेरे दायीं तरफ मेरे पिता के मुस्लिम परिचारक का बेटा बैठा करता था और मेरी बाईं ओर एक मछुआरे का बेटा. सुभाष चन्द्र बोस ने अपने इलाज के लिए स्विट्जरलैंड जाने का निश्चय किया तो सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया. यथा सभंव नेता जी की मौत नही हूई थी 16 जनवरी 2014 गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट ने नेताजी के लापता होने के रहस्य से जुड़े खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की माँग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के लिये स्पेशल बेंच के गठन का आदेश दिया। आजाद हिंद सरकार के 75 साल पूर्ण होने पर इतिहास मे पहली बार साल 2018 मे ने किसी प्रधानमंत्री के रूप में 15 अगस्त के अलावा लाल किले पर तिरंगा फहराया। 11 देशो कि सरकार ने इस सरकार को मान्यता दी थी। सुभाष के पिता जानकीनाथ बोस का सन् 1905 का चित्र विकिमीडिया कॉमंस से नेताजी सुभाषचन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी सन् 1897 को के शहर में हिन्दू परिवार में हुआ था । उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और माँ का नाम प्रभावती था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वकील थे। पहले वे सरकारी थे मगर बाद में उन्होंने निजी प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। उन्होंने कटक की महापालिका में लम्बे समय तक काम किया था और वे के सदस्य भी रहे थे। अंग्रेज़ सरकार ने उन्हें रायबहादुर का खिताब दिया था। प्रभावती देवी के पिता का नाम गंगानारायण दत्त था। दत्त परिवार को का एक कुलीन कायस्थ परिवार माना जाता था। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 सन्तानें थी जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाष उनकी नौवीं सन्तान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरद चन्द्र से था। शरदबाबू प्रभावती और जानकीनाथ के दूसरे बेटे थे। सुभाष उन्हें मेजदा कहते थे। शरदबाबू की पत्नी का नाम विभावती था। सुभाष का उन दिनों का चित्र जब वे सन् 1920 में इंग्लैण्ड आईसीएस करने गये हुए थे कटक के प्रोटेस्टेण्ट यूरोपियन स्कूल से प्राइमरी शिक्षा पूर्ण कर 1909 में उन्होंने रेवेनशा कॉलेजियेट स्कूल में दाखिला लिया। कॉलेज के प्रिन्सिपल बेनीमाधव दास के व्यक्तित्व का सुभाष के मन पर अच्छा प्रभाव पड़ा। मात्र पन्द्रह वर्ष की आयु में सुभाष ने विवेकानन्द साहित्य का पूर्ण अध्ययन कर लिया था। 1915 में उन्होंने इण्टरमीडियेट की परीक्षा बीमार होने के बावजूद द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण की। 1916 में जब वे दर्शनशास्त्र ऑनर्स में बीए के छात्र थे किसी बात पर प्रेसीडेंसी कॉलेज के अध्यापकों और छात्रों के बीच झगड़ा हो गया सुभाष ने छात्रों का नेतृत्व सम्हाला जिसके कारण उन्हें प्रेसीडेंसी कॉलेज से एक साल के लिये निकाल दिया गया और परीक्षा देने पर प्रतिबन्ध भी लगा दिया। 49वीं बंगाल रेजीमेण्ट में भर्ती के लिये उन्होंने परीक्षा दी किन्तु आँखें खराब होने के कारण उन्हें सेना के लिये अयोग्य घोषित कर दिया गया। किसी प्रकार स्कॉटिश चर्च कॉलेज में उन्होंने प्रवेश तो ले लिया किन्तु मन सेना में ही जाने को कह रहा था। खाली समय का उपयोग करने के लिये उन्होंने टेरीटोरियल आर्मी की परीक्षा दी और फोर्ट विलियम सेनालय में रँगरूट के रूप में प्रवेश पा गये। फिर ख्याल आया कि कहीं इण्टरमीडियेट की तरह बीए में भी कम नम्बर न आ जायें सुभाष ने खूब मन लगाकर पढ़ाई की और 1919 में बीए ऑनर्स की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। में उनका दूसरा स्थान था। पिता की इच्छा थी कि सुभाष आईसीएस बनें किन्तु उनकी आयु को देखते हुए केवल एक ही बार में यह परीक्षा पास करनी थी। उन्होंने पिता से चौबीस घण्टे का समय यह सोचने के लिये माँगा ताकि वे परीक्षा देने या न देने पर कोई अन्तिम निर्णय ले सकें। सारी रात इसी असमंजस में वह जागते रहे कि क्या किया जाये। आखिर उन्होंने परीक्षा देने का फैसला किया और 15 सितम्बर 1919 को इंग्लैण्ड चले गये। परीक्षा की तैयारी के लिये लन्दन के किसी स्कूल में दाखिला न मिलने पर सुभाष ने किसी तरह किट्स विलियम हाल में मानसिक एवं नैतिक विज्ञान की ट्राइपास ऑनर्स की परीक्षा का अध्ययन करने हेतु उन्हें प्रवेश मिल गया। इससे उनके रहने व खाने की समस्या हल हो गयी। हाल में एडमीशन लेना तो बहाना था असली मकसद तो आईसीएस में पास होकर दिखाना था। सो उन्होंने 1920 में वरीयता सूची में चौथा स्थान प्राप्त करते हुए पास कर ली। इसके बाद सुभाष ने अपने बड़े भाई को पत्र लिखकर उनकी राय जाननी चाही कि उनके दिलो-दिमाग पर तो और महर्षि के आदर्शों ने कब्जा कर रक्खा है ऐसे में आईसीएस बनकर वह अंग्रेजों की गुलामी कैसे कर पायेंगे? यह निर्भय वीर योद्धा अंग्रेजो के पथ में एक अटल चट्टान की भांति खड़ा हो अपने देश की आजादी की पुकार करने वाला था. अभिगमन तिथि 23 नवम्बर 2013. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Subhash Chandra Bose सुभाष चन्द्र बोस Quote 10: As soldiers, you will always have to cherish and live up to the three ideals of faithfulness, duty and sacrifice.

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Subhash Chandra Bose Biography In Hindi

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और मै भी इन सारी बातो को नही मानता था. वे ब्रिटिश कालीन भारत में रहते थे, वे पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने रेडियो और सूक्ष्म तरंगों की प्रकाशिकी पर कार्य किया. सच तो यह है की भारत के युवको जैसे भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, सुभाष चन्द्र बोस से लेकर राष्ट्रपिता जी, आदि की इकट्ठी कोशिशो के बाद भारत वर्ष एक आजाद देश बन सका. नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का मानना था कि भारत से अंग्रेजी हुकूमत को ख़त्म करने के लिए सशस्त्र विद्रोह ही एक मात्र रास्ता हो सकता है. जिसमे नेता जी का देहांत हो गया ऐसा समाचार टोकियो रेडियो ने 1945 में प्रसारित किया. इससे सम्बंधित उनकी दो किताबे लिविंग एंड नॉन-लिविंग 1902 और दि नर्वस मैकेनिज्म ऑफ़ प्लांट्स 1926 को भी प्रकाशित किया गया.


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Netaji Subhash Chandra Bose in Hindi : क्या हवाई दुर्घटना से बच गए थे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस?

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रामधारी सिंह दिनकर हिंदी के प्रसिद्ध लेखक, कवी एवं निबंधकार थे इन्होने इतिहास, दर्शनशास्त्र और राजनीति विज्ञान की पढ़ाई पटना विश्वविद्यालय से की और साहित्य के रूप में उन्होंने संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेज़ी और उर्दू का गहन अध्ययन किया था। इनका जन्म 23 सितम्बर 1908 को हुआ था दिनकर जी को कई सम्मानों से पुरस्कृत किया गया था, और इनकी मृत्यु 24 अप्रैल 1974 को तमिलनाडु में हुई थी रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 ई. Subhash Chandra Bose सुभाष चन्द्र बोस Quote 9: We should have but one desire today, the desire to die so that India may live? साथ ही आप भी देख सकते हैं. सुभाष चन्द्र बोस के अनमोल विचार Quote 1: Give me blood and I shall give you freedom! Subhash Chandra Boss Biography in Hindi भारत माँ की आजादी के लिए भारतवासियों ने जो बलिदान दिया उसे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता. वे भारत के पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने एक अमरीकन पेटेंट प्राप्त किया. उनके योगदान को देखते हुए चाँद पर प्राप्त ज्वालामुखी विवर को भी उन्ही के नाम पर रखा गया.

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Our mission is to provide an online platform to help students to share essays in Hindi language. अभिगमन तिथि २३ जनवरी २०१८. अंग्रेजी सरकार के लिए बोस एक बहुत बड़ी सिरदर्द बन चुके थे. उनके पिता मानते थे कि अंग्रेजी सीखने से पहले अपनी मातृभाषा अच्छे से आनी चाहिए. उनके यंत्रो का परिणाम काफी अच्छा था. नेताजी को भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए किये गए प्रयत्नों के लिए हमेशा याद रखा जायेगा.


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सुभाषचन्द्र बोस Subhash Chandra Bose Life Essay in Hindi

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बाद में चिकित्सा की पढाई करने के लिये वे इंग्लैंड की लंदन यूनिवर्सिटी गये. उनके अविष्कारों को देखते हुए उन्हें कई पुरस्कार भी दिये गये. अतः सुभाष चन्द्र बोस ने अपना जीवन अपने देश और मानवता के लिए अर्पित करने का अटल निश्चय किया. मेरी माँ एक पुराने संस्कारो की महिला थी लेकिन फिर भी भेदभाव और अछूतों की बातो पर उन्हें जरा भी भरोसा नही था, वह इन सारी बातो को बेतुका मानती थी, उन्होंने हमेशा मुझे समभाव की शिक्षा दी. ये गरम दल के सदस्य थे. कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जगदीश चंद्र बोस के बारे में विकिपीडिया से ली गयी है. वनस्पति विज्ञान में उन्होनें कई महत्त्वपूर्ण खोजें की.

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dr subhash chandra bose ki jivani Archives

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He was born on 23 January 1897 in Cuttack, Bengal province of Orissa. आनर्स दर्शनशास्त्र के प्रथम वर्ष के छात्र थे। लाइब्रेरी के स्व-अध्ययन कक्ष में पढ़ते हुये इन्हें बाहर से झगड़े की कुछ अस्पष्ट आवाजें सुनायी दे रही थी। बाहर जाकर देखने पर ज्ञात हुआ कि अंग्रेज प्रोफेसर ई. उन्होंने एक यन्त्र क्रेस्कोग्राफ का आविष्कार किया और इससे विभिन्न उत्तेजकों के प्रति पौधों की प्रतिक्रिया का अध्ययन किया. बचपन से ही सुभाष चन्द्र बोस तेज बुद्धि के मालिक थे. कहा जाता है की खोज करते समय पौधों के विच्छेदन की गंध से उनकी बीमारी और बढती जा रही थी.

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